जाने अपने विवाह का योग, जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा?

अगर अब तक आप अविवाहित हैं। और आपके विवाह होने में किसी प्रकार की बाधा आ रही है। और इसलिए आप अपने विवाह को लेकर बहुत चिंतित है। इसलिए आप ये जानना चाहते है कि, जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? तो ये आर्टिकल आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होने वाला है। क्योंकि मैंने अपने आज के इस आर्टिकल में आपको ये बताया है कि, जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? और इसके साथ ही मैने आपको और भी बहुत कुछ बताया है। जो आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।

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क्या विवाह में आ रही रुकावते? तो जानें जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा?

ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके विवाह में दिक्कतें आ रही है। या यह पता नहीं लग पा रहा है। कि उनके विवाह का योग कब से बन रहा है। ऐसे में वो बहुत परेशान हो जाते हैं। और यह जानना चाहते हैं। कि जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? तो मैं आपको बता दूं कि हमारे हिंदू धर्म में ज्योतिष शास्त्र का बहुत बड़ा महत्त्व है। क्योंकि हम सभी, ज्योतिषों से अपनी जन्म कुंडली दिखाते है। और वो हमारे भविष्य के बारे में हमे बहुत कुछ बताते है।

ज्योतिष जन्म कुंडली देखकर हमारे विवाह की भी गणना करते है। इसलिए इससे हमे हमारी विवाह की पूरी जानकारियां प्राप्त हो जाती है। जिसमे हमे हमारे विवाह की स्थिति के साथ साथ ये भी पता चलता है, कि हमारा जोन वाला जीवन साथी किस प्रवृत्ति का होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस जातक के कुंडली मे लग्न भाव मे शुभ ग्रह रहता है। उस जातक की शादी जल्दी होने का योग बनता है।

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परंतु यदि किसी जातक के जन्म कुंडली के लग्न भाव में मंगल, राहु, केतु, शनि जैसे असुभ ग्रहों के रहने पर उस जातक की शादी देर से होती है। तो आईए जानते है। कि आपके जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किसी जातक के जन्म कुंडली के सप्तम भाव के आधार पर ही विवाह का योग बनता है। विवाह का योग बनने के लिए आवश्यक है कि शनि और गुरु दोनों ही सप्तम भाव या लग्न को देखें तभी किसी जातक के विवाह का योग बनता है।

शुक्र और गुरु को विवाह का कारक कहा गया है। इसलिए शुक्ला और गुरु की महादशा और अंतर्दशा या सप्तमेश की महादशा और अंतर्दशा में किसी भी जातक के शादी का एक प्रबल योग बनता है। अगर सरल शब्दों में बताऊं तो जन्म कुंडली के सातवें भाव में जो ग्रह स्थित रहता है। उसी के आधार पर विवाह का समय देखा जाता है। अर्थात ग्रहों के आधार पर ही यह पता लगाया जाता है कि, उस जातक की शादी होने की संभावना कब है। या उस जातक के विवाह का योग कब का बन रहा है।

जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में बुध ग्रह स्थित रहता है। उसे जातक की शादी बहुत जल्दी हो जाती है। अर्थात उसे जातक की शादी का योग मात्र 20 वर्ष से ही बनना आरंभ हो जाता है। परंतु यह तभी संभव है जब बुध ग्रह पर किसी अशुभ ग्रह का छाया ना हो। या आपकी जन्म कुंडली में किसी भी प्रकार का दोष न हो।

  • जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में गुरु स्थित रहता है। उस जातक के विवाह का योग 24 से बनना प्रारंभ होता है। गुरु को लड़कियों के विवाह का कारक कहा जाता है। अर्थात जिस भी लड़की के सातवें भाव में गुरु स्थित रहता है। उस अविवाहित लड़की की शादी बहुत जल्दी हो जाती है।
  • किसी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में शुक्र के रहने पर उसे जातक के शादी का योग 26 वर्ष से बनता है। ऐसे जाताक का जीवन साथी बहुत प्यार करने वाला होता है।
  • जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में सूर्य और राहु रहता है। उसके विवाह का योग 27 वर्ष से बन्ना आरंभ होता है। वहीं अगर जन्म कुंडली के सातवें भाव में मंगल स्थित रहता है। तो उस व्यक्ति के शादी का योग 28 वे वर्ष से बनना आरंभ होता है। जबकि अगर आपके जन्म कुंडली के सातवें भाव में शनि और केतु स्थित है। तो आपके विवाह का योग 30 वर्ष से बनना आरंभ होगा।
  • जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में शुभ ग्रह स्थित रहता है। उसे खूबसूरत जीवनसाथी मिलता है। वहीं अगर जिस जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव में अशोक ग्रह स्थित रहते हैं। उसका जीवनसाथी गुस्सैल प्रवृत्ति का होता है।

विवाह में विलंब के कारण | विवाह में विलंब किन योगों के कारण होता है?

जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा

ऐसे बहुत से लोग है। जो हर तरह से परफेक्ट रहते है। फिर भी उनके विवाह में बाधाए आती है। और इसलिए लोग जानना चाहते है कि, जन्म कुंडली के अनुसार उनका विवाह कब होगा। तो मैं आपको बता दूं कि विवाह के देरी होने का कारण, जन्म कुंडली का सप्तम भाव और सप्तमेश का बिगड़ा हुआ होना है। यानी सप्तम भाव में कोई न कोई अशुभ ग्रह राहु, केतु, शनि सुनिश्चित होंगे।

या फिर इन ग्रहों की सप्तम भाव पर दृष्टि होगी। जिसके कारण विवाह में देरी होगी। ऐसे में बहुत से लोग ये सोचने लगते हैं कि मांगलिक होने के कारण उनके विवाह में देरी हो रही है। परंतु आपका विवाह देरी से होगा या शीघ्र होगा ये सब कुछ सप्तम भाव ही तय करता हैं।

  • जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सातवें भाव या सप्तमेश भाव पर शनि की दृष्टि पड़ती है। उसके विवाह में विलंब होता है। सनी को तीन दृष्टि प्राप्त है 3, 7, 10। अगर आपके लग्न कुंडली में शनि दसवें भाव में या तीसरे भाव में या पांचवें भाव में रहता है तो सप्तमीज परेशानी की दृष्टि रहती है जिससे आपके विवाह में विलंब होता है।
  • जिस जातक के जन्म कुंडली में शनि सातवें भाव में या सप्तमेश के साथ युति कर रहा हो। तो भी विवाह में विलंब होने की संभावना होती है।
  • जिस जातक के जन्म कुंडली का सप्तम भाव 6, 8, 12 भाव में पीड़ित हो। या 6, 8, 12 भाव के स्वामी सप्तम भाव में हो तो भी विवाह में विलंब होगा।
  • जिस भी जातक के लग्न कुंडली का सप्तम भाव या सप्तमेश पापकर्तरी दोष से पीड़ित हो। पापकर्तरी दोष से आशय है कि, यदि भाव के 12वे और दूसरे, दोनो ओर पापक ग्रह हो जैसे राहु केतु मंगल सूर्य शनि हो तो उसके विवाह में विलंब होता है।
  • जिस भी जातक के जन्म कुंडली के सप्तम भाव में मंगल और शुक्र की युति हो। या पंचम भाव में मंगल और शुक्र हो तो उसे जातक के विवाह में परेशानी होगी।

जल्दी विवाह के लिए क्या करना चाहिए?

अगर आप मनचाहा वर प्राप्त करना चाहते है। या आपके विवाह में किसी भी प्रकार की बाधाए आ रही है। और आप अपनी विवाह में आ रही बाधाओ को दूर करना चाहते है। और जल्द विवाह का योग बनाना चाहते हैं। तो यह उपाय करें।

  • मनचाहा वर पाने के लिए और शीघ्र विवाह करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का रोजाना पूजा करना चाहिए। इसके लिए रोजाना भोर में स्नान कर के भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेल–पत्र, अक्षत ,चंदन चढ़ा कर पूजा करना चाहिए। और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आप मनचाहा वर चाहते है। और अपने विवाह में आ रहे बाधा को दूर करना चाहते है। तो आपको सोलह सोमवार का व्रत रखना चाहिए। सुरेश कुमार का व्रत रखने से मनचाहा व मिलता है और विवाह में आ रही सारी बढ़ाएं भी दूर हो जाती है।
  • पूर्णिमा के शुभ अवसर पर वट वृक्ष की 108 परिक्रमा लगाने से उसके विवाह में आ रही सारी बढ़ाएं दूर हो जाती है।
  • शीघ्र विवाह करने के लिए या अपने विवाह में आ रही बाधाओ को दूर करने के लिए जो भी जातक गुरुवार के दिन गाय को दो रोटी में हल्दी का तिलक लगाकर और उसके साथ गुड़ व पीली दाल खिलाता है। उसके विवाह में आने वाली साड़ी बढ़ाएं दूर हो जाती है और उसके विवाह शीघ्र होने का योग बना आरंभ हो जाता है।
  • जिस पर जातक के विवाह में बधाएं आ रही हो। या वह शीघ्र विवाह करना चाहता हो। उसे भगवान बृहस्पति की पूजा करनी चाहिए। और बृहस्पति का व्रत रखना चाहिए। और बृहस्पति वार के दिन केले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। और भगवान विष्णु को गुड़, केले और पीले चने की दाल का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से जातक के विवाह में आ रही सारी बधाई दूर हो जाती है और उसके शीघ्र विवाह का योग बना आरंभ हो जाता है।
  • यदि किसी कन्या या किसी वर्ग के विवाह में बाधाएं उत्पन्न हो रही है। तो उन्हें एक बहुत ही सरल उपाय करना है। वह उपाय यह है कि, उन्हें पूजा के लिए पांच नारियल लेना है। और भगवान शिव के आगे अर्पित कर उन्हें ओम श्री वर प्रदाय श्री नमः मंत्र का जाप करना है। इस मंत्र का जाप वो अपने सुविधा अनुसार 108 बार 151 बार या जितने भी बार वह करना चाहे कर सकते हैं। ऐसा उन्हें लगातार पांच सोमवार तक करते रहना है। इससे उनके विवाह में आने वाली सारी बाधाएं दूर हो जाएगी। और शीघ्र ही उनके विवाह का योग बनना आरंभ हो जाएगा।

विवाह के कारक

  1. जन्म कुंडली के सप्तम भाव पर गुरू, शुक्र आदि जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो।
  2. जन्म कुंडली में लग्न सप्तमेस में हो।
  3. जन्म कुंडली में सप्तमेश का स्वामी केंद्र में स्थित हो।
  4. जन्म कुंडली में सप्तमेष ग्यारहवें भाव में हो।
  5. जन्म कुंडली में सप्तेश ऊपर उठकर लगनेश से युति बना रहा हो।
  6. जन्म कुंडली में सप्तम भाव नवम भाव में हो तो शादी होती है।

मेरा जीवनसाथी कैसा होगा?

आज के समय में लोगो को अपने जीवन साथी के बारे के जानने की बहुत उत्सुकता रहती है कि, वो कैसा होगा?, किस स्वभाव का होगा?, तो आईए जानते है कैसा होगा आपका जीवनसाथी?

जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा
  • यदि किसी जातक चाहे वो लड़का हो या लड़की उसके जन्म कुंडली के सातवें भाव में सूर्य स्थित हो । तो उसका होने वाला या होने वाली जीवन साथी काफी तेजस्वी स्वभाव के गुण वाला होगा। सूर्य के प्रभाव से गोल चेहरा , तेज ललाट , वाला आकर्षित होगा। साथ ही यहां पर सूर्य आपको आपके परिवार से दूर रहने के लिए विवश कर देगा।
  • यदि आपके जन्म कुंडली के सातवें भाव में चंद्रमा होगा। तो आपका होने वाला जीवन साथी का रंग गोरा होगा साथ ही उसकी पर्सनैलिटी आकर्षित करने वाली होगी या होगा। साथ ही वो बहुत केरिंग करने वाला होगा या होगी।
  • यदि आपके कुंडली के सप्तम भाव मे शुक्र स्थित हो तो आपका होने वाला जीवन साथी अति सुंदर होगा या होगी। नपी–तुली बात करने वाला होगा। साथ ही आपके जीवन साथी को संगीत और प्रकृति से बहुत प्रेम होगा।
  • यदि आपके जन्म कुंडली के सातवें भाव में 1,8,10 में से कोई भी एक अंक लिखा हो और साथ में मंगल स्थित हो तो। तो ऐसे लड़के लड़की के जीवन साथी का स्वभाव काफी तेज और गुस्सैल स्वभाव का और काफी स्वाभिमानी होता हैं। आपका जीवन साथी लीडर प्रवृत्ति का होगा। साथ ही उसका रंग साफ होने के साथ साथ उसके चेहरे पर लालिमा दिखाई देगी। आपका विवाह दक्षिण की और होने का संकेत देता है।
  • यदि आपकी कुंडली के सप्तम भाव में 3 या 6 अंक लिखा हो और यहां बुद्ध स्थित हो। उस जातक का जीवन साथी ज्ञानी, न्यायप्रिय, मधुरभासी, अच्छा वक्ता होता या होती हैं।
  • यदि आपके कुंडली के सप्तम भाव में 4,9,12 में से कोई भी अंक लिखा हो और बृहस्पति स्थित हो। तो ऐसे जातक का होने वाला या वाली जीवनसाथी बहुत ही सुंदर, शांत स्वाभाव का होता हैं। और वो एक धार्मिक प्रवृत्ति का होता है।
  • यदि आपके कुंडली के सप्तम भाव मे शनि स्थित हो। तो आपका होनेवाला जीवन साथी आपसे थोड़ा ज्यादा उम्र का हो सकता या सकती हैं। या फिर वो ज्यादा उम्र का दिखने वाला हो सकता या सकती हैं।
  • यदि सप्तम भाव का अधिपति द्वादस भाव में स्थित हो ऐसे जातक का विवाह उनके जन्म स्थान से बहुत दूर होता है। इसके साथ ही अगर आपके कुंडली के 1,4,7,10 के से कोई भी अंक स्थित और इसके कोई भीं ग्रह स्थित हो या न भी हो तो भी ऐसे जातक का विवाह बहुत दूर होता है।
  • यदि आपके कुंडली के सप्तम भाव में मंगल और शनि की युति हो रही हो या आपस ने दृष्टि संबंध हो तो ये वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत नही है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के बीच तनाव बना रहता है और छोटी मोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता है।
  • यदि किसी जन्म कुंडली के अंतर्गत पंचम भाव के अधिपति सप्तम भाव में स्थित हो। और सप्तम भाव के अधिपति पंचम भाव में स्थित हो। या फिर दोनो की जा कर एक साथ स्थित हो। ऐसे लड़के या लडकियों का प्रेम विवाह होता है।
  • यदि कुंडली के सप्तम भाव ने चंद्रमा और शनि की युति हो रही हो ऐसी लड़कियों का विवाह अधिक उम्र में होता हैं। इनके विवाह से पूर्व अनेक प्रकार की परेशानियां आती है।

क्या है वैवाहिक जीवन मे लड़ाई होने के कारण?

  • यदि कुंडली के सप्तम भाव में केतु के साथ मंगल युति बना रहा हो। तो ये वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत नही है। ऐसे लोगो के दांपत्य जीवन में हमेसा लड़ाई होते रहता हैं।
  • यदि किसी लड़की के कुंडली के सप्तम भाव में राहु स्थित हो। तो ऐसे लडकी का जीवन साथ नशा का सेवन करने वाला हो सकता है। या अन्य लड़कियों के साथ भी उसके अवैध संबंध हो सकते है।
  • यदि आपके कुंडली के सप्तम भाव में मंगल और शनि की युति हो रही हो या आपस ने दृष्टि संबंध हो। तो ये वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत नही है। ऐसी स्थिति में पति पत्नी के बीच तनाव बना रहता है और छोटी मोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता है।
  • यदि किसी लड़के या लड़की के जीवन कुण्डली में बुध और शनि की युति हो रही हो। तो इनके दांपत्य जीवन में प्यार की कमी बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र में इन ग्रहों को नपुंसक माना गया है। इनके कारण एक दांपत्य जीवन में प्रेम की कमी बनी रहती है।

कुंडली से कैसे जाने शादी किस दिशा में होगी?

बहुत से लोगों के मन में ये प्रश्न उठता है कि, जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? या कुंडली से कैसे जाने विवाह किस दिशा में होगा? तो आइए जानते है किस दिशा में होगा आपका विवाह?

  • सातवे भाव में सूर्य स्थित रहने से : यदि आपके सातवे भाव में सूर्य है तो आपके विवाह का आपके जन्म स्थान से पूर्व दिशा में होने का संकेत है।
  • सातवे भाव में चंद्रमा स्थित रहने से : यदि सप्तम भाव में चन्द्र हो तो आपके विवाह का संकेत उत्तर दिशा की ओर मिलता है।आपके ससुराल के आस पास कोई नदी या दुर्गा मां के मंदिर होने का भी संकेत मिलता है।
  • सातवे भाव में शुक्र स्थित रहने से : आपके विवाह का संकेत आपके जन्म स्थान से दक्षिण दिशा की ओर बनता हैं।
  • सातवे भाव में मंगल स्थित रहने से : ऐसी स्तिथि में आपके विवाह का संकेत आपके जन्म स्थान से उत्तर दिशा की और का बनता है।
  • सातवे भाव में बुध स्थित रहने से : इनके विवाह का संकेत इनके जन्म स्थान से उत्तर दिशा की ओर का मिलता है। बृहस्पति के प्रभाव से आपके ससुराल के आस पास कोई तीर्थ स्थल या कोई मंदिर अवश्य ही होगा।
  • सातवे भाव में बृहस्पति स्थित रहने से : ऐसे जातक के विवाह का संकेत पश्चिम दिशा की ओर का मिलता है।

जन्मतिथि से जाने विवाह कब होगा?

ज्योतिष शास्त्र में विवाह की स्थिति जानने के लिए जन्म तिथि से भी उपाय बताया गया है। यह एक बहुत ही सरल तरीका है। यह जानने के लिए कि आपका विवाह कब होगा इस तरीके को अपनाने के लिए आपको अपने जन्म तिथि को तब तक जोड़ते रहना है। जब तक उसका एक अंक ना बन जाए।

जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा

उदाहरण के लिए 13 जनवरी 1991 = इस जन्मतिथि को आपको तब तक जोड़ते रहना है। जब तक उसमें से एक अंक ना निकल जाए। मैं आपको जोड़ कर बताती हूं। 10/1/1992= 1+0+1+1+9+9+2= 23, 23 = 2+3 = 5 ये आपके जीवन पथ संख्या है। यदि आपका पथ संख्या 5 है तो, आपका विवाह 30 से 35 वर्ष के बीच होगा। और यदि अगर आपका पथ संख्या 2 है तो आपका विवाह 25 से 30 वर्ष की आयु में होगा।

भगवान शादी में देरी क्यों करता है?

शादी विवाह में विलंब होने का कारण सप्तम भाव में अशुभ ग्रह को दृष्टि पड़ना हो सकता है। जब सप्तम भाव पर राहु,केतु, शनि जैसे अशुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ती है तो विवाह में विलंब होता है। इसके लिए आपको भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। इससे आपके विवाह शिग्र होने की संभावना बढ़ती है।

कैसी होगी जीवनसाथी की आर्थिक स्थिति?

  • जिस जातक के कुंडली में यदि चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र भाव के स्वामी के साथ युति करता है। तो ऐसे जातक का जीवनसाथी व्यवसायी होता है।
  • किसी जातक के जीवनसाथी के व्यापारी होने की स्भावना तब होती है । जब सप्तमेश, दूसरे पांचवे, नववे, दसवें, या बारहवें भाव में स्थित हो। और बुध, शुक्र, और चन्द्र सप्तमेश भाव में हो।
  • अगर आपके जीवन पत्रिका में आपके चतुर्थ भाव का स्वामी दूसरे भाव या बारहवें में होता हैं। तो जीवनसाथी कोई नौकरी करने वाला होता है।
  • यदि आपके जीवन पत्रिका के सातवे भाव में राहु, केतु जैसे अशुभ ग्रह स्थित हो या सप्तमेश आठवें या फिर बारहवें में स्थित हो तो ऐसे जातक का जीवनसाथी एक साधारण नौकरी करने वाला होगा।
  • अगर किसी जातक के जीवन पत्रिका सप्तमेश और चतुर्थेश उच्च में हो और एक दूसरे के साथ युति रखता हो। तो ऐसे जातक का जीवनसाथी उच्चाधिकारी होने की संभावना होता है।
  • यदि आपके जन्म पत्रिका में शनि का चतुर्थ भाव से संबंध बनता हैं। तो आपका जीवन साथी नौकरी करने वाला होगा।

विवाह के लिए इन ग्रहों के लिए ये दिशा है शुभ

  1. मेष : मेश राशि वालो के लिए पूर्व और दक्षिण–पूर्व दिशा में विवाह करना अच्छा माना गया है। अगर मेष राशि वालो का विवाह इन दिशाओं में होता है तो उनका पारिवारिक संबंध बहुत मजबूत होगा। दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहेगा।
  2. वृष : वृष राशि वालों के लिए दक्षिण और उत्तर पश्चिम दिशा की ओर विवाह करना शुभ माना गया है। इन दिशाओं में शादी करने से आपके जीवन में कभी भी कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। साथी आपकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहेगी।
  3. मिथुन : मिथुन राशि वालों के लिए पूर्व और उत्तर–पूर्व दिशा में विवाह करना शुभ माना गया है। अगर मिथुन राशि वालों का विवाह हिंदी में होता है तो ऐसे में उनके आने वाले संतान की आर्थिक स्थिति बेहतर रहेंगी। साथ ही भविष्य में आपके साथ कोई भी अनहोनी नहीं होगी।
  4. कर्क : कर्क राशि वालों के लिए दक्षिण और दक्षिण–पश्चिम दिशा की ओर विवाह करना शुभ माना गया है। कर्क राशि वालों के लिए दिशा उनके साथ-साथ उनके संतानों के लिए भी बहुत अनुकूल है।
  5. सिंह : सिंह राशि वालों के लिए पश्चिम उत्तर–पश्चिम दिशा की और विवाह करना शुभ माना गया है। इन दिशा में शादी करने से सिंह राशि वालों के परिवार में हो रहे पारिवारिक कलह का भी अंत हो जाएगा।
  6. कन्या : कन्या राशि वालों को उत्तर और उत्तर–पूर्व दिशा में विवाह करना चाहिए। यह दिशा आपको आपके काम में तरक्की दिला सकता है।
  7. तुला : तुला राशि वालों को पूर्व और दक्षिण–पूर्व दिशा में विवाह करना शुभ माना गया है। मीन राशि में विवाह करने से आपको ढेर सारी खुशियां मिल सकती है।
  8. वृश्चिक : वृश्चिक राशि वालों को दक्षिण और दक्षिण–पश्चिम दिशा में विवाह करना चाहिए। इन दिशा में विवाह करने से वृश्चिक राशि वालों को कभी भी पैसे की कमी महसूस नहीं होगी। साथ ही उन्हें उनके कार्य क्षेत्र में ढेर सारी सफलता मिलेगी।
  9. धनु : धनु राशि वालों के लिए पश्चिम और उत्तर–पश्चिम दिशा में विवाह शुभ माना गया है। इन दिशा में शादी करने से धनु राशि वालों को कभी भी बड़ी बीमारी होने का खतरा नहीं रहता है।
  10. मकर : मकर राशि वालों के लिए उत्तर और उत्तर–पश्चिम दिशा में विवाह करना शुभ माना गया है। इन दिशा में विवाह करने से मकर राशि वालों के जीवन में उन्हे शत्रुओं से खतरा नहीं रहता है। साथ हीं उनके माता का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
  11. कुंभ : कुंभ राशि वालों के लिए पूर्व और दक्षिण–पूर्व दिशा में विवाह करना शुभ माना गया है। इस दिशा में विवाह करने से कुंभ राशि वालों का पारिवारिक जीवन काफी सुखमय होता है।
  12. मीन : मीन राशि वालों के विवाह के लिए दक्षिण और दक्षिण– पश्चिम दिशा माना गया है। ये दिशा आपके लिए बहुत शुभ है। साथ ही ये आपके परिवार के संबंधों को अच्छा करता है।

निष्कर्ष:

हमने अपने इस आर्टिकल के माध्यम से आपके बहुत से प्रश्नों का उत्तर दिया है। जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न था कि, जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? इस प्रश्न का उत्तर हमने विस्तार पूर्वक आपको अपनी शादी कर में दे दिया है। साथी विवाह और राशि से संबंधित बहुत सारी जानकारियां आप तक पहुंचाई है। और आपको बताया है हमारे कुंडली के सातवें भाव में उपस्थित ग्रह ही यह तय करता है कि, हमारा विवाह कब होगा शीघ्र होगा या हमारे विवाह में विलंब होगा। ऐसे ही हमने विवाह से संबंधित और भी बातें आपको बता दी है। उम्मीद है कि हमारा यह आर्टिकल आप सभी लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा। धन्यवाद

डिस्क्लेमर – इस लेख में वर्णित जानकारी और सामग्री के सटीकता के विश्वास की गारंटी हमारी या हमारी टीम की नही हैं। हमने आपको ये सारी जानकारियां विभिन्न मध्यम जैसे ज्योतिष, पंडित, पंचांग, विभिन्न धर्म ग्रंथ से इकट्ठी कर के आप तक पहुंचाई है। हमारे उद्देश्य बस सूचनाओं/जानकारियों को आपतक पहुंचाना है। इसके अलावें इसके उपयोग की जिम्मेदारी हमारी नही होगी। इसके उपयोग की जिम्मेदारी केवल उपयोग करने वाले की होगी।

FAQs:

Q. विवाह न होने के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है?

विवाह ना होने के लिए कुंडली के साथ अशुभ ग्रहों जैसे शनि, राहु, केतु की दृष्टि जिम्मेदार है।

Q. विवाह के देवता कौन से हैं?

कृष्ण–राधा, शिव–पार्वती, कामदेव–रति, चंद्रमा को विवाह का देवता कहा जाता है।

Q. कौन सा ग्रह अच्छी पत्नी देता है?

बृहस्पति ग्रह अच्छी पत्नी की प्राप्ति करता है।

Q. अच्छी पत्नी की पहचान क्या है?

अच्छी पत्नी वही होती है। जो अपने पति के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होती है।

Q. कौन सा घर विवाह का संकेत देता है?

जन्म कुंडली का सप्तम भाव विवाह का संकेत देता है।

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको बताया केवल अपनी जन्म कुंडली के अनुसार विवाह कब होगा? और विवाह से संबंधित सभी जानकारी देने का प्रयास किया है। आशा करती हूं, कि मेरा यह आर्टिकल आप सभी के लिए उपयोगी साबित हुआ होगा। ऐसे ही और अन्य सभी जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट Suchna Kendra से जुड़े रहे। और हमारे Telegram Channel अवश्य Join करें।

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