दो विवाह का योग कब बनता है? जानें, किन कारणों से बनता है योग

नमस्कार दोस्तों। आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे दो विवाह का योग कब बनता है? और इनसे जुड़ी सारी जानकारी जैसे कौन सी ग्रह दो विवाह के योग का कारण होता है। दो विवाह का योग किस भाव के कारण बनता है। दो विवाह का योग जातक के कुंडली में कैसे बनता है। कुंडली में विवाह का योग कैसे देखें? दो विवाह का योग हस्तरेखा से कैसे देखें और ज्योतिष में दो विवाह का योग का क्या मतलब है? यह सारी जानकारी आज के आर्टिकल में हम आपको देने का प्रयास करेंगे, तो कृपया आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

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दो विवाह का योग कब बनता है?

हमारे भारत देश के हिंदू धर्म में लगभग 16 संस्कार है। इनमें से एक संस्कार विवाह है। जिसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ काम माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे हिंदू धर्म में तकरीबन आठ प्रकार के विवाह होते हैं। जो इस प्रकार है।

  1. ब्रह्म विवाह
  2. देव विवाह
  3. आर्ष विवाह
  4. प्रजाप्त्य विवाह
  5. असुर विवाह
  6. गंधर्व विवाह
  7. राक्षस विवाह
  8. पिशाच विवाह

इन सभी विवाहों में ब्रह्म विवाह, देव विवाह, आर्ष विवाह और प्रजाप्त्या विवाह को अत्यंत उत्तम माना जाता है। विवाह का हिंदू धर्म में अपनी एक अलग अहमियत होता है। विवाह कई देवी देवताओं को साक्षी मानकर संपन्न किया जाता है। इसे बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र का माने तो व्यक्ति की कुंडली और ग्रह मिलकर एक ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। जिनके वजह से व्यक्ति का विवाह का योग बनता है।

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परंतु जब व्यक्ति का दूसरा शादी होता है। तब इस योग को अशुभ माना जाता है। यह इसलिए अशुभ माना जाता है, कि किसी भी व्यक्ति को अपना पहला विवाह को खत्म करने में काफी परेशानियां होता है, और दूसरे विवाह करने में भी इन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जब व्यक्ति की दूसरी विवाह होता है, तब इसे ज्योतिष के भाषा में दो विवाह के योग के नाम से जाना जाता है।

कौनसी ग्रह दो विवाह के योग का कारण होता है?

दो विवाह का योग कब बनता है

दो विवाह के योग ग्रहों के वजह से बनता है। जिसमें से कुछ ग्रह महत्वपूर्ण होता है जो इस प्रकार से हैं।

  1. राहु ग्रह: राहु ग्रह की वजह से भी किसी भी जातक का दो विवाह का योग बनता है। और यह तब बनता है, जब राहु ग्रह का स्थिति अत्यंत खराब होता है।
  2. केतु ग्रह: केतु ग्रह के वजह से भी जातक का दो विवाह का योग बनता है। जब केतु का स्थिति अत्यंत शुभ होता है, तब यह योग बनता है।
  3. बुध ग्रह: दो विवाह के योग के लिए बुध ग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जब जातक के बुध ग्रह का स्थिति काफी खराब होता है। तब यह योग बनता है।
  4. बृहस्पति ग्रह: किसी भी जातक का दो विवाह का योग तब बनता है। जब उसका बृहस्पति ग्रह शुभ होता है। क्योंकि बृहस्पति की स्थिति इन पर प्रभाव डालती है।
  5. शनि ग्रह: जातक का दो विवाह का योग शनि ग्रह की वजह से भी बनता है। जब शनि ग्रह का स्थिति अच्छा होता है, तब जातक के कुंडली में दो विवाह का योग बनता है।

दो विवाह का योग किस भाव के कारण बनता है?

किसी भी जातक का दो विवाह का योग भाव के वजह से भी बनता है। वो भाव इस प्रकार से है।

  1. द्वादश भाव: द्वादश भाव को जातक के दो विवाह के योग के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। क्योंकि द्वादश भाव नुकसान और हानि से संबंधित है। पर यह भाव जातक के विवाह से भी जुड़ा हुआ है। यदि जातक के कुंडली में द्वादश भाव की स्थिति में ग्रह या बुध, शुक्र और बृहस्पति होता है। तब जातक का दो विवाह का योग संभव हो पता है।
  2. द्वितीय भाव: द्वितीय भाव में ग्रहों की स्थिति को दो विवाह के योग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। द्वितीय भाव भोजन, वाणी और निधि से संबंधित होता है। अगर इस भाव में सुख से संबंधित कोई ग्रह हो। तो, विवाह में काफी संघर्ष और न होने की संभावना ज्यादा होती है।
  3. सप्तम भाव: जातक के दो विवाह के योग के लिए सप्तम भाव को महत्वपूर्ण माना गया है। सप्तम भाव प्रेम विवाह का अधिकारी है। ज्योतिष का माने तो सप्तम भाव में अगर कोई ग्रह या शुक्र, गुरु, बुध, सूर्य और चंद्रमा होता है। तब जातक का दो विवाह का योग संभव होता है।
  4. अष्टम भाव: द्वादश भाव की तरह ही अष्टम भाव में नुकसान और हानि होने की वजह से जातक का दो विवाह का योग बनता है। ज्योतिष का मानना है, कि शनि को सप्तम भाव में होने की वजह से जातक का दूसरा विवाह का योग बनता है

दो विवाह का योग जातक के कुंडली में कैसे बनता हैं?

किसी भी जातक की कुंडली में दो विवाह का योग तब बनता है। जब जातक के कुंडली में शनि, राहु और केतु उपस्थित होते हैं। ऐसी स्थिति में जातक को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषों के अनुसार जातक के कुंडली के सातवें घर में शुक्र का प्रभाव पड़ता है। तब जातक का दो विभाग का योग बनता है। इसके अलावा जातक की कुंडली के सातवें घर में शुक्र ग्रह के साथ मिलकर अन्य ग्रह चंद्रमा, बुध, गुरु और सूर्य होता है। तब भी जातक का दो विवाह का योग बनता है।

कुंडली में विवाह का योग कैसे देखें?

दो विवाह का योग कब बनता है

किसी भी जातक के विवाह के योग उनके कुंडली के द्वारा देखा जाता है। ज्योतिषों का मानना है कि किसी भी जातक का विवाह का योग तब बनता है। जब उनके कुंडली में लग्नेश गोचर सप्तम भाव में होता है। उनका कहना होता है विवाह का कारक ग्रहों को माना जाता है। जो ग्रह है शुक्र और बृहस्पति ग्रह जिनके वजह से जातक का विवाह का योग बनता है।

सके अलावा जातक की कुंडली में लग्नेश की महादशा व अंतर्दशा चलने पर भी जातक का विवाह का योग बनता है। ज्योतिषों का यह भी कहना है कि अगर बृहस्पति व शुक्र की महादशा और अंतर्दशा चल रही हो। तो, जातक की कुंडली में तो उनके पत्रिका में विवाह का योग बनता है।

दो विवाह का योग हस्त रेखा से कैसे देखें?

किसी भी जातक का हाथ का रेखा उसके वैवाहिक जीवन के बारे में बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर जातक के हथेली के रेखा में दो विवाह का योग है। तो उस रेखा का भी अलग अर्थ होता है। तो आईए जानते हैं कि किसी भी जातक का हस्त रेखा उनके दो विवाह के योग को कैसे बताता है?

  1. दो समांतर रेखा: अगर जातक के हथेली में दो समांतर रेखा मौजूद है। जो छोटी उंगली और हार्ट लाइन के बीच में होता है। तब जातक का दो विवाह का योग होने का संभावना होता है।
  2. एक छोटी और समांतर रेखा: यदि जातक के हस्त रेखा छोटी और समांतर है। तो यह दर्शाता है, कि जातक का विवाहित जिंदगी में कोई तीसरा इंसान आ सकता है।
  3. हार्ट लाइन की ओर झुकाव: अगर जातक का विवाह का रेखा हार्ट लाइन की तरफ झुका है। तब जातक को विवाहित जिंदगी में समस्याओं को दर्शाता है। अगर विवाह लाइन हार्ट लाइन को काट रहा है। तब जातक का विवाहित जिंदगी काफी दयनीय होने का संभावना होता है।
  4. टूटी हुई विवाह लाइन: यदि जातक के हस्तरेखा में विवाह लाइन टूटा हुआ है। तो जातक को विवाहित जिंदगी में तलाक होने का आसार हो सकता है। यह भी माना जाता है कि, अगर जातक के हस्तरेखा जितना टूटा होगा। उतना बार जातक का विवाह का योग का संभावना हो सकता है।

ज्योतिष में दो विवाह का योग का क्या मतलब है?

किसी भी जातक की कुंडली में दो विवाह का योग बनता है। तब उसे ज्योतिष शास्त्र में दूसरी विवाह के नाम से जाना जाता है। ऐसी स्थिति में जातक के कुंडली में भाव और कुछ ग्रह जिम्मेदार होते हैं। ये भाव और ग्रह मिलकर जातक की दो विवाह के योग का निर्माण करता है। ज्योतिषों के अनुसार समुद्र शास्त्र में भी दो विवाह की योग का विवरण किया गया है। समुद्र शास्त्र में बताया गया है कि जातक के कनिष्ठा उंगली के निचले भाग पर बनने वाली आड़ी टेढ़ी रेखाओं की वजह से जातक का दो विवाह का योग बनता है। क्योंकि समुद्र शास्त्र के अनुसार जातक के हथेली के निचले भाग पर बुध पर्वत स्थित होता है।

दो विवाह योग से आप क्या समझते हैं?

दो विवाह का योग कब बनता है

दो विवाह के योग से हम यह समझते हैं, कि जब जातक की कुंडली में शनि, राहु और केतु उपस्थित होता है, और इसके अलावा जाति की कुंडली के सातवें घर में शुक्र का प्रभाव पड़ता है। तब जातक का दो विवाह का योग बनता है। इस स्थिति में जातक को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि जातक को पहले शादी से निकलकर दूसरे शादी करने में काफी कठिनाइयों होता है। और जातक को काफी दुख तकलीफ का सामना करना पड़ता है।

निष्कर्ष:

आज के इस आर्टिकल में हमने दो विवाह का योग कब बनता है? के बारे में आप लोगों को जानकारी देने का प्रयास किया है। और इससे जुड़ी जानकारी जैसे किसी भी जातक की कुंडली में दो विवाह का योग किन कारणों और ग्रहों के वजह से बनता है। इसके अलावा दो विवाह की योग के लिए कौन सा भाव जिम्मेदार होता है। यह सारी चीज आज के आर्टिकल में हमने बताया है। आशा करती हूं कि आपलोगों को ये सारी जानकारी अच्छा लगा होगा।

डिस्क्लेमर – इस लेख में वर्णित जानकारी और सामग्री के सटीकता के विश्वास की गारंटी हमारी या हमारी टीम की नही हैं। हमने आपको ये सारी जानकारियां विभिन्न मध्यम जैसे ज्योतिष, पंडित, पंचांग, विभिन्न धर्म ग्रंथ से इकट्ठी कर के आप तक पहुंचाई है। हमारे उद्देश्य बस सूचनाओं/जानकारियों को आपतक पहुंचाना है। इसके अलावें इसके उपयोग की जिम्मेदारी हमारी नही होगी। इसके उपयोग की जिम्मेदारी केवल उपयोग करने वाले की होगी।

FAQs:

Q. किन कारणों से होता है जातक का दूसरा विवाह ?

किसी भी जातक का दूसरा विवाह उनके ग्रहों से और भावों से होता है।

Q. कुंडली में दूसरी विवाह के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है ?

किसी भी जातक के दूसरी विवह के लिए राहु, केतु, बुध, बृहस्पति और शुक्र ग्रह जिम्मेदार होता है।

Q. दो विवाह के योग के लिए व्यक्ति की कुंडली में कौन सा घर जिम्मेदार होता है ?

दो विवाह के योग के लिए किसी भी व्यक्ति के कुंडली में सातवां घर जिम्मेदार होता है।

Q. कुंडली में दूसरी शादी के लिए कौन सा भाव जिम्मेदार होता है ?

किसी भी जातक के दूसरे विवाह के लिए उसकी कुंडली में द्वादश भाव, तृतीय भा,व सप्तम भाव, और अष्टम भाव जिम्मेदार होता है।

Q. दूसरी शादी का योग कैसे बनता है ?

समुद्र शास्त्र के अनुसार किसी भी जातक के कनिष्ठा उंगली के नीचे आड़ी टेढ़ी रेखाओं के बनने की वजह से दूसरी शादी का योग बनता है।

इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको बताया दो विवाह का योग कब बनता है? और दो विवाह से संबंधित सभी जानकारी देने का प्रयास किया है। आशा करती हूं, कि मेरा यह आर्टिकल आप सभी के लिए उपयोगी साबित हुआ होगा। ऐसे ही और अन्य सभी जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट Suchna Kendra से जुड़े रहे। और हमारे Telegram Channel अवश्य Join करें।

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